MovieRulz 2022, Download or Watch New Movies 2022, LINK!

MovieRulz 2022 : वेबसाइट users के बीच एक लोकप्रिय पायरेटेड वेबसाइट है। इस वेबसाइट पर आपको सभी तरह की मूवीज जैसे Bollywood, Hollywood और लेटेस्ट वेब सीरीज भी आसानी से मिल जाती है बल्कि तमिल, तेलुगु फिल्में भी मिलती हैं। यदि आप भी new Telugu movies 2022 download करने के दीवाने हैं तब तो शायद आपको movierulz Telugu shows downloading के विषय में जरुर पता होगा. ऐसा में इसलिए कह रहा हूँ क्यूंकि Tamilrockers के बाद यदि किसी new Telugu movies online downloading website का नाम आता है तो वो सिर्फ और सिर्फ MovieRulz.vpn ही है.

अपने इस वेबसाइट के बारे में सुना ही होगा अगर यदि आपने अभी तक भी इसके विषय में नहीं सुना है तब थोडा patience रखिये क्यूंकि इस पोस्ट के अंत तक आपको MovieRulz  के विषय में सभी जरुरी जानकारी प्राप्त हो जाएगी. यह एक Pirated website ही इसलिए ऐसे website से कोई भी content फिर चाहे वो malayalam movies download हो या फिर कोई dubbed हिंदी मूवी हो. उन्हें download करने से पहले आपको इस website के विषय में थोड़ी बहुत जानकारी जरुर से प्राप्त कर लेनी चाहिए क्यूंकि आगे चलकर आपको इसमें कोई doubt न हो की इनसे movies download करना चाहिए भी या नहीं.

इस लिए आज मै सोची की क्यूँ न आप लोगों को movieRulz के विषय में वो सभी बाते बता दू जो की इसे ख़ास और  उतना की dangerous भी बनाता है. movieRulz के बारे में सारी जानकारी लेने के लिए इस पोस्ट को पूरा पढ़े |

MovieRulz New Site Link 2022

movierulz.hp एक Movie Piracy Site है. जो की अभी के समय में लोगों के बीच में काफी popular है. यदि आपको भी नयी फिल्में देखना पसदं है तब आप internet के जरिये MovieRulz.ps से फिल्म download कर सकते हैं. MovieRulz.vc मूवी और Tv show देखने के लिए एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है। वेबसाइट पर या अपने ऐप के माध्यम से देखने के लिए 10,000 से अधिक फिल्में प्रदान करती है। वेबसाइट का लुक बहुत ही फ्रेश और साफ है। MovieRulz VPN वेबसाइट अभी अंग्रेजी, हिंदी, तमिल और तेलुगु में उपलब्ध है। इसमें क्षेत्रीय भाषा के उपशीर्षक भी उपलब्ध हैं ताकि लोग अपनी मातृभाषा के बावजूद अपने पसंदीदा टीवी शो का आनंद ले सकें-

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movierulz.itmovierulz.psmovierulz.hymovierulz.hsmovierulz.hp4movierulz.vpnmovierulz.xyzmovierulz.xsmovierulz.maxmovierulz.acmovierulz.hit4movierulz.ps3movierulz.vcmovierulz.wapmovierulz.psmovierulz.vcmovierulz.pzmovierulz.hpmovierulz.pe3movierulz.stmovierulz.stmovierulz.max

MovieRulz Kya Hai (What Is MovieRulz )?

MovieRulz वेबसाइट movierulz.st एक प्रसिद्ध गैरकानूनी (illegal) वेबसाइट है। यह बिलकुल अन्य टोरेंट वेबसाइट की तरह ही काम करती है। MovieRulz Movie Download व TV Shows की फ्री डाउनलोड लिंक प्रदान करने वाली एक फ्री Movie Downloading Site है, जहां पर Pirated मूवीज़ ऑनलाइन देखी और डाउनलोड की जा सकती है। इन सब कंटेंट को गैरकानूनी तरीके से MovieRulz डाले जाते है

APK NameMovierulz
File Size9 MB
LanguagesHindi, English, Telugu, Tamil
App Version2022
Downloads50,000,000+

हम आपको बताना चाहेंगे कि Muviesrulz. Com वेबसाइट को Unblock करने के लिए आपको VPN यानी कि वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क की सहायता लेनी पड़ेगी। VPN के उपयोग से आप आसानी से इस वेबसाइट को एक्सेस कर पाएंगे। यदि आप अपने कंप्यूटर, लैपटॉप या मोबाइल पर मूवी या टीवी शो डाउनलोड करना चाहते है। तो MovieRulz Downloading 2020 से मूवीज को डाउनलोड करने के लिए का सबसे पहले आपको VPN सॉफ्टवेयर को अपने PC, फोन या टैबलेट पर इंस्टॉल करना होगा। इसके बाद आप नई-नई मूवीज को ऑनलाइन स्ट्रीम कर पाएंगे

MovieRulz से सभी Movies Download कैसे करे

अब हम चले जानते हैं की MovieRulz से कोई user movie download कैसे कर सकता है. Bollywood, Hollywood, South, के साथ आप अपनी पसंदीदा तेलुगु फिल्में भी सिर्फ एक क्लिक से डाउनलोड कर सकते हैं। आप इन स्टेप्स को फॅालो करके movierulz.ps से अपनी फेवरेट मूवी देख सकते है। movierulz.xyz Movie Download करने के लिए इन बातों पर ध्यान दीजिए।और इन चरणों को फ़ॉलो करने के बाद आप अपनी फेवरेट मूवी मुफ्त में देख सकते हैं।

3movierulz.vc Movies पर आप Latest Movies Movierulz.Se से डाउनलोड करना चाहते हैं, जानिए MovieRulz से कैसे मूवी डाउनलोड करें।

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  • Movierulz.Com में पहले VPN की मदद से किसी दूसरी देश के IP एड्रेस का उपयोग करें।
  • movierulz.hd में IP एड्रेस शिफ्ट होने के बाद Movierulz पर जाएं।
  • 4movirulze मे अपनी पसंदीदा मूवी पर क्लिक करें।
  • Link खोलने के बाद, “Download Movie” पर क्लिक करें।

Movierulz में नई मूवीज के साथ कई भाषाओं में मूवीज डाउनलोड कर सकते हैं। MovieRulz  2022 Working Link अपने लाखो यूजर्स को फ्री में मूवीज देखने और डाउनलोड करने की सुविधा प्रदान करता है।

4 MovieRulz.In या 4MovieRulz.in वेबसाइट तेलगु मूवी डाउनलोड करने के भी विकल्प देती है। इसके कई डोमेन्स चल रहे है जैसे- Movierulz.Htc, Movierulz.hy और Movierulz.vom, Movierulz.Se, MovieRulz.com, Mp4movierulz आदि जिनसे आप मूवी डाउनलोड कर सकते है।

Movierulz App

MovieRulz मूवी डाउनलोड करने की एक बेहतरीन गैरकानूनी साइट है। movierulz.hy वेबसाइट का अपना एक पर्सनल ऐप भी हैं। जो बहुत ही सरल और उपयोगकर्ताओं को मूवी डाउनलोड करने में सहायक है। जो बहुत ही easy और user फ्रेंडली है ये app इसलिए popular है की क्योंकि इसमें आप movierulz.ac वेब सीरीज को ऑनलाइन भी देख सकते हैं। इस app से आप अपने लैपटॉप या फ़ोन में 3movierulz.st से डाउनलोड करके अपने पसंदीदा मूवीज़ को घर बैठे देख सकते हैं। Movierulz app में आप बॉलिवुड की लेटेस्ट मूवीज़ को उनके रिलीजिंग डेट के अनुसार खोज सकते हैं। इस website में आपको हॉलीवुड की सभी सुपरहिट मूवीज़ भी आसानी से मिल जाती है।

Features of Movierulz

  • Movierulz फ्री और पूरी तरह से ऑनलाइन वेबसाइट है।
  • वेबसाइट की सामग्री अलग-अलग Categories में उपलब्ध है।
  • यह मूवीज का बहुत बड़ा कलेक्शन अपने उपयोगकर्ताओं को प्रदान करती है।
  • कोई भी इसे आसानी से एक्सेस कर सकता है; इसका एक सरल यूजर इंटरफेस है।
  • इसमें एक Auto-Play विकल्प भी मिलता है जो एक TV Series में अगला एपिसोड स्वचालित रूप से चलाता है।

Movierulz सेफ है या नहीं ?

Movierulz से Movierulz.com 2022 मूवीज़ डाउनलोड करना बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं होता है। क्योंकि ये एक गैरकानूनी वेबसाइट के रूप में काम करती है। जो पायरेसी जैसे गैर कानूनी तरीके से मूवीज़ को कॉपीराइट करके अपनी website पर अपलोड करती है। और अपनी इनकम जेनरेट करने के लिए Ad नेटवर्क का उपयोग करके अच्छी खासी income gain करती है। Movierulz.com वेबसाइट का उपयोग करने से आपको बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। Movierulz मूवी डाउनलोड करने की एक बेहतरीन गैरकानूनी साइट है। जो गैरकानूनी तरीके से अच्छी मूवी आपको प्रोवाइड कराती है।

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Movie Qualities & Formats

MovieRulz.Com बॉलीवुड मूवी वह Movierulz मूवी डाउनलोड इन हिन्दी मैं आपको मूवी डाउनलोड करने के लिए वेबसाइट पर कुछ फॉर्मेट मिलेंगे जो इस प्रकार है

  • 320p
  • 480P
  • 720p
  • 200MB
  • 300MB
  • 400MB
  • Full HD
  • BluRay
  • AVC/x264
  • x265/Hevc

Latest Leaked Movies

Movierulz.Com Telugu 2022 Download में सिर्फ 2022 की ही नहीं इसके पहले के सालों में भी मूवी रूल्ज़ द्वारा कई सारी नई मूवीज़ को लीक किया गया है, जिसे यह अपने New Domain पर अपलोड करती रहती है।  इस website द्वारा 2022 वर्ष में लीक की गयी मूवीज़ ये सब है |

  • Udaan 2022
  • Radhe: Your Most Wanted Bhai [2022]
  • Master (South Movie)
  • Gulabo Sitabo
  • Ala Vaikunta Puram (South Movie)
  • Saraileru Neekevvaru (South Movie)
  • Bachan Pandey
  • Bell Bottom
  • Loop Lapeta
  • Atrangi Re
  • Madam Chief Minister
  • The Girl On The Train

Movie Categories

Movie Rules.Com में आपके लिए अलग-अलग Category की मूवी है-

  • Crime Shows
  • Tamil Movies
  • Web Series
  • Action Movies
  • Kannada
  • Comedy Movies
  • TV Shows
  • Hollywood
  • 2022 Telugu Movies
  • Malayalam Movies

Movie Rules Downloading 2020 ने कई सारी हिट और सुपरहिट मूवीज को इसने अपनी वेबसाइट पर लीक किया था। Moviezrulez.Com 2022 पर आपको वो सभी मूवीज़ की केटेगरी जिन्हें उपयोगकर्ता द्वारा सबसे ज्यादा देखा जाता है। Muvierulz. Com और MovieRulz.In Download साइट से किसी भी मूवी को डाउनलोड करने के लिए आपको 3Moviezrulz का वर्तमान में सक्रिय वेबसाइट को खोजना होगा। सभी पॉपुलर वेब सीरीज के कलेक्शन बहुत बढ़िया क्वालिटी में मिल जाएंगे। यह वेबसाइट Game Of Thrones All Parts in Hindi Dubbed पर आपको Sony Liv औरDaisney + Hotstar के सभी लेटेस्ट वेब सीरीज और video भी मिलते हैं। ये वेबसाइट को भी लाखों लोगों को मुफ्त में डाउनलोड करा चुकी हैं। इस सीरीज के सारे पार्ट्स आपको इस वेब साइट पर मिल जाएंगे।

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Illegal Website Name

  • 9xmovies
  • Tamilrockers
  • SkymoviesHD
  • Extramovies
  • SSR Movies
  • Cinebloom
  • Vegamovies
  • mkvCinemas
  • HDhub4u
  • Mkv Movies Point
  • Movie Rush
  • Pagalworld
  • DJMaza
  • DjPunjab
  • KatmovieHD
  • Khatrimaza
  • Filmy4wap
  • JalshaMoviez
  • ExtraMovies

ऊपर दी गई सूची में सभी वेब साइट Movierulz.Com वेबसाइट की तरह गैरकानूनी है और इनका उपयोग करने से आपको बहुत हानि हो सकती है। आपसे अनुरोध है कि आप मूवीज़ देखने और डाउनलोड करने के लिए लीगल वेबसाइट का ही उपयोग करे

Legal Website Name

  • YouTube
  • Zee5
  • Big Flix
  • Popcornflix
  • MX Player
  • Sony Crunch
  • Prime Flix
  • Ullu
  • Jio Cinema
  • Netflix
  • Amazon Prime Video
  • Disney Hotstar
  • SonyLiv
  • Voot
  • Hot Star

ऊपर दी गई सूची में सभी वेब साइट Movierulz.Com वेबसाइट की तरह गैरकानूनी नहीं है और इनका उपयोग करने से आपको कोई भी हानि नहीं होगी आपसे अनुरोध है कि आप मूवीज़ देखने और डाउनलोड करने के लिए लीगल वेबसाइट का ही उपयोग करे

Join MovieRulz Telegram Channel

अभी ही कुछ समय पहले की बात ही की सरकार ने MovieRulz.hit के मेन site को Google से remove कर दिया था. ऐसा इसलिए क्यूंकि बहुत से media companies से इस piracy को लेकर शिकायत करी. जिस वजह से main site को delete कर दिया गया. ऐसे में 4 movierulz साइट के loyal viewers में खलबली मच गयी की अब कहाँ से movies download करी जाये. वहीँ जल्द ही MovieRulz.plz के backend team ने MovieRulz.new website को launch कर दिया viewers के लिए. इस new site में पहले के जैसे ही वो सभी HD movies उपलब्ध है download करने के लिए. वहीँ आप चाहें तो MovieRulz से 300mb dual audio English movies भी download कर सकते हैं. इससे आपको भाषा को लेकर कोई परेशानी नहीं होगी बाद में. वहीँ आप दुसरे भाषा के movies का आनंद भी उठा सकते हैं.

एब्सट्रैक्ट इंडिया ने हाल ही में ऑनलाइन डिजिटल वातावरण में कॉपीराइट सामग्री के लिए “पर्याप्त” सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से भारतीय कॉपीराइट कानून में कुछ डिजिटल अधिकार प्रबंधन (डीआरएम) प्रावधान पेश किए हैं। फिल्म उद्योग भारत में नए डीआरएम प्रावधानों के पीछे सबसे बड़े पैरवी समूहों में से एक था, और उद्योग लगातार ऑनलाइन पायरेसी को एक बड़े खतरे के रूप में चित्रित करने की कोशिश कर रहा है। भारतीय फिल्म उद्योग भी पायरेटेड सामग्री की मेजबानी करने वाली संदिग्ध वेबसाइटों तक इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की पहुंच को रोकने के लिए भारत में उच्च न्यायालयों से जॉन डो के आदेशों का व्यापक रूप से उपयोग करता है। यह पेपर भारत में नए डीआरएम प्रावधानों के संदर्भ में दो प्रश्नों की पड़ताल करता है: (1) क्या ऑनलाइन पायरेसी भारतीय फिल्म उद्योग के लिए खतरा है? और (2) क्या फिल्म उद्योग द्वारा किए गए वर्तमान उपाय ऑनलाइन पायरेसी के मुद्दे को संबोधित करने के लिए इष्टतम उपाय हैं? भारत में किए गए एक व्यापक अनुभवजन्य सर्वेक्षण के आंकड़ों के आधार पर, यह पेपर उद्योग के दावों पर सवाल उठाता है कि भारत में ऑनलाइन पायरेसी पर्याप्त स्तर पर है। भारत में इंटरनेट उपयोग संबंधी डेटा भी अनुभवजन्य सर्वेक्षण के निष्कर्षों का समर्थन करता है। हालांकि, पेपर ने देखा कि पायरेटेड भारतीय फिल्म सामग्री इंटरनेट में प्रचुर मात्रा में है और यह उन सामग्री की मजबूत मांग के अस्तित्व को दर्शाता है। पायरेटेड भारतीय फिल्मों की मेजबानी करने वाली विभिन्न वेबसाइटों के सावधानीपूर्वक विश्लेषण के आधार पर, पेपर दिखाता है कि उन पायरेटेड फिल्मों के सबसे संभावित उपभोक्ता विदेशों में रहने वाले लाखों (संभावित) उपभोक्ता हैं। * पोस्ट-डॉक्टरल शोधकर्ता, कानून के दर्शन के लिए केंद्र – जैव विविधता शासन अनुसंधान इकाई, कैथोलिक यूनिवर्सिटी ऑफ लौवेन (यूसीएल), बेल्जियम। ईमेल: [email protected] इस अध्ययन में उपयोग किए गए अनुभवजन्य डेटा को इंटरनेशनल मैक्स प्लैंक रिसर्च स्कूल फॉर कॉम्पिटिशन एंड इनोवेशन, म्यूनिख में लेखक के डॉक्टरेट शोध के हिस्से के रूप में एकत्र किया गया था, और लेखक मैक्स प्लैंक सोसाइटी से अनुभवजन्य सर्वेक्षण के लिए प्राप्त वित्तीय सहायता को धन्यवाद देता है। . लेखक इस पेपर के पहले मसौदे पर व्यावहारिक सुझावों के लिए मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी, विशेष रूप से प्रोफेसर सीन पेजर द्वारा आयोजित क्रिएटिव अपस्टार्ट्स सम्मेलन (नवंबर 9-10, 2012) के लिए आईपी के प्रतिभागियों के लिए भी आभारी हैं। 648 मिशिगन स्टेट इंटरनेशनल लॉ रिव्यू [वॉल्यूम। 21:3 पेपर का तर्क है कि भारतीय कॉपीराइट कानून के तहत डीआरएम प्रावधानों का अधिनियमन या व्यापक व्यापक जॉन डो आदेश इस तरह की चोरी का समाधान कभी नहीं हो सकता है। विदेशों में भारतीय फिल्म सामग्री की चोरी मुख्य रूप से विदेशों में उपभोक्ताओं (संभावित) उपभोक्ताओं तक पहुंचने के लिए अभिनव व्यापार मॉडल का पता लगाने में भारतीय फिल्म उद्योग की विफलता के लिए जिम्मेदार है। कागज का तर्क है कि भारतीय फिल्म उद्योग वैध उत्पादों को उन उपभोक्ताओं तक पहुंचाकर ही ऑनलाइन पायरेसी के लिए स्थायी समाधान प्राप्त कर सकता है। परिचय फिल्में भारत में लोगों के सांस्कृतिक जीवन का एक अभिन्न अंग हैं और लाखों भारतीयों के लिए वे मनोरंजन का एकमात्र सुलभ और किफायती रूप भी हैं। भारत में लोगों के सांस्कृतिक जीवन में फिल्मों द्वारा निभाई गई इस महत्वपूर्ण भूमिका ने भी ऐतिहासिक रूप से भारतीय फिल्म उद्योग को भारत में कॉपीराइट कानून के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में सक्षम बनाया है। 1 कॉपीराइट के उपचार के रूप में लंबी कारावास की शर्तों और भारी जुर्माना का समावेश भारतीय कॉपीराइट कानून के तहत उल्लंघन भारत में फिल्म उद्योग की पैरवी शक्ति के ऐतिहासिक उदाहरणों में से एक है। 2 जबकि उन उपायों को 1980 के दशक की शुरुआत में उस समय की उभरती प्रौद्योगिकियों (वीएचएस) से फिल्म उद्योग की चुनौतियों को दूर करने के लिए शामिल किया गया था। प्लेयर्स और वीडियो कैसेट्स), फिल्म उद्योग के हालिया प्रयासों का उद्देश्य नए डिजिटल द्वारा उत्पन्न चुनौतियों का समाधान करना है

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एल प्रौद्योगिकी,

खासकर ऑनलाइन पायरेसी। अतीत में तीव्र पैरवी के परिणामस्वरूप

कई वर्षों से, भारतीय संसद ने हाल ही में कॉपीराइट कानून में संशोधन किया है

कुछ विशिष्ट डिजिटल अधिकार प्रबंधन (“DRM”) प्रावधान शामिल करें। NS

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उद्योग भी हाल के दिनों में ऑर्डर हासिल करने में अत्यधिक सफल रहा है

कई वेबसाइटों तक इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की पहुंच को रोकने के लिए न्यायपालिका से

पायरेटेड फिल्मों की मेजबानी करने का संदेह है।3

लेकिन क्या ऑनलाइन पायरेसी भारतीय फिल्म उद्योग के लिए खतरा है? वर्तमान हैं

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फिल्म उद्योग द्वारा उठाए गए कदमों को संबोधित करने के लिए इष्टतम उपाय

भारतीय मीडिया सामग्री की ऑनलाइन चोरी का मुद्दा? ये हैं प्राथमिक

नए डीआरएम प्रावधानों के संदर्भ में इस अध्ययन द्वारा संबोधित प्रश्न

और भारत में न्यायपालिका का अत्यधिक सक्रिय दृष्टिकोण। अध्ययन का उपयोग करता है

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अनुसंधान में मिश्रित विधि दृष्टिकोण, जो मोटे तौर पर के उपयोग को संदर्भित करता है

एक अध्ययन में या एक श्रृंखला में दोनों गुणात्मक और मात्रात्मक घटक

1. इस अध्ययन में ‘भारतीय फिल्म उद्योग’ शब्द का प्रयोग क्षेत्रीय’ के संदर्भ में किया गया है

पूरे भारत में फिल्म उद्योग, न केवल बॉलीवुड के लिए। भारतीय फिल्म उद्योग

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विभिन्न क्षेत्रीय फिल्म उद्योग शामिल हैं और बॉलीवुड केवल हिंदी का प्रतिनिधित्व करता है

भाषा फिल्में।

2. देखें कॉपीराइट अधिनियम, 1957, संख्या 14, संसद के अधिनियम, 1957, 63-63A,

कॉपीराइट (संशोधन) अधिनियम, 1984 द्वारा संशोधित।

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3. देखें जूही गुप्ता, जॉन डो भारत में कॉपीराइट इंजंक्शंस, 18 जे.आई.पी.आर. 351, 353

(2013)।

2013] भारतीय फिल्मों की ऑनलाइन पायरेसी 649

एक ही अंतर्निहित घटना की जांच करने वाले अध्ययनों के।4 The

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इस अध्ययन में मात्रात्मक घटकों में एक अनुभवजन्य सर्वेक्षण के डेटा शामिल हैं

भारत के चुनिंदा हिस्सों में लेखक द्वारा संचालित। गुणात्मक घटक

अध्ययन में कॉपीराइट कानून और प्रासंगिक मामले का विश्लेषण शामिल है

कानून। गुणात्मक विश्लेषण में इंटरनेट की परीक्षा भी शामिल है

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प्राथमिक और द्वितीयक डेटा का उपयोग करते हुए उपयोग संबंधी डेटा और पायरेसी संबंधी डेटा

स्रोत।

यह पत्र इस प्रकार आयोजित किया गया है: इस संक्षिप्त परिचय के बाद है

अनुभाग II, जो ऑनलाइन पायरेसी पर डेटा को अलग करने की झलक प्रदान करता है

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भारत। जबकि इस खंड का पहला भाग इसका एक सिंहावलोकन प्रदान करता है

उद्योग डेटा, इस खंड का दूसरा भाग इसका एक सिंहावलोकन प्रदान करता है

भारत में लेखक द्वारा किए गए अनुभवजन्य सर्वेक्षण के डेटा। इस

अनुभाग पायरेटेड भारतीय फिल्म सामग्री की ऑनलाइन उपलब्धता का भी विश्लेषण करता है

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और उसी के संभावित उपभोक्ता। धारा III का विश्लेषण करता है

नए कानूनी प्रावधानों की प्रभावशीलता और भारतीयों के दृष्टिकोण

में निष्कर्षों की पृष्ठभूमि में, ऑनलाइन पायरेसी के संबंध में न्यायपालिका

खंड द्वितीय। खंड III के लिए कुछ व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत करता है

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भारतीय फिल्म उद्योग ऑनलाइन पायरेसी के मुद्दे को स्थायी रूप से संबोधित करेगा

रास्ता। पेपर कुछ समापन टिप्पणियों के साथ समाप्त होता है।

I. भारतीय फिल्मों की ऑनलाइन पाइरेसी

दुनिया भर के अधिकांश अन्य फिल्म उद्योगों की तरह, भारतीय फिल्म उद्योग

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यह तर्क देने के लिए मीडिया और उद्योग-प्रायोजित अध्ययनों पर व्यापक रूप से निर्भर करता है

भारत में ऑनलाइन पायरेसी काफी है।5 इनमें से सबसे उल्लेखनीय

अध्ययन, जो भारतीय फिल्म उद्योग के विचारों को ऑनलाइन प्रस्तुत करता है

पायरेसी, इज इंडिया: इंटरनेट पाइरेसी लैंडस्केप ऑडिट, एनविजनल द्वारा आयोजित

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और मोशन पिक्चर्स एसोसिएशन (इसके बाद “एमपीए” के रूप में संदर्भित)

अध्ययन”).6

एमपीए अध्ययन का दावा है कि फिल्म सामग्री की ऑनलाइन चोरी महत्वपूर्ण है

भारत में।7 एमपीए अध्ययन के अनुसार, भारतीयों का सबसे बड़ा समूह है

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भारतीय सामग्री-केंद्रित टोरेंट साइटों के आगंतुक, और वे भी बनाते हैं

पांच प्रमुख में जाने वाले लोगों का सबसे बड़ा या दूसरा सबसे बड़ा समूह

4. नैन्सी एल। लीच और एंथोनी जे। ओनवेगबुज़ी, मिश्रित विधियों की एक टाइपोलॉजी

अनुसंधान डिजाइन, 43 गुणवत्ता और मात्रा 265, 267 (2009)।

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 5. देखें प्रेस विज्ञप्ति, ऑनलाइन पाइरेसी भारतीय फिल्म के लिए एक वास्तविक खतरा और

टेलीविजन उद्योग, मोशन पिक्चर्स एसोसिएशन एशिया पैसिफिक (दिसंबर 15, 2009), यहां उपलब्ध है

http://mpa-i.org/index.php/news/online_piracy_a_genuine_threat_to_the_indian_film_televis

ion_industry/ (पिछली बार 15 अक्टूबर 2012 को देखा गया था); ऑनलाइन पायरेसी में भारत शीर्ष 10 में; टेलीविजन,

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फिल्म इंडस्ट्री टेक अ हिट, द फाइनेंशियल एक्सप्रेस, 16 दिसंबर 2009, http://www.financia

leexpress.com/news/indiaamongtop10inonlinepiracy%3Btelevision-filmingdustrytakeahit/554

531(पिछली बार 19 अक्टूबर 2012 को दौरा किया गया था)।

6. काल्पनिक और मोशन पिक्चर्स एसोसिएशन, भारत: इंटरनेट पायरेसी

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लैंडस्केप ऑडिट (2009)।

7. आईडी। 3-4 बजे।

650 मिशिगन स्टेट इंटरनेशनल लॉ रिव्यू [वॉल्यूम। 21:3

अंतरराष्ट्रीय बिट-टोरेंट साइट।8 पांच प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बिट-टोरेंट साइटें

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उनकी रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि मिनिनोवा, टोरेंट्ज़, थेपिरेटबे, इसोहंट,

और बीटीजंकी। जबकि भारतीयों को आगंतुकों का सबसे बड़ा समूह माना जाता है

टोरेंट्ज़, वे यू.एस. से केवल उन लोगों के बाद दूसरे स्थान पर हैं

शेष चार.9 एमपीए अध्ययन कुछ दिलचस्प डेटा भी प्रदान करता है

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पायरेटेड फिल्में डाउनलोड करने के संबंध में। वे ट्रैक करने का दावा करते हैं

छह हॉलीवुड फिल्में डाउनलोड करने वाले कंप्यूटरों के आईपी पते।10

उनके आंकड़े बताते हैं कि भारतीयों का चौथा सबसे बड़ा समूह है

वें 6.5%

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कुल डाउनलोड करने वालों में से।11 तुलनात्मक विश्लेषण के आधार पर, एमपीए अध्ययन

दावा है कि भारत में ब्रॉडबैंड चोरी का उच्चतम स्तर है

ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या।12

एमपीए अध्ययन अवैध . के संबंध में कुछ आंकड़े भी प्रदान करता है

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बॉलीवुड फिल्मों को डाउनलोड करना।13 यह के बारे में अनुमान प्रदान करता है

चार सप्ताह के दौरान कुछ फिल्मों की अवैध डाउनलोडिंग जिसमें से a

पायरेटेड कॉपी उपलब्ध थी, और तर्क देती है कि अवैध डाउनलोड पर्याप्त हैं

भारत में।14 उनकी रिपोर्ट के अनुसार, उनके विश्लेषण में एक फिल्म,

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कामिनी, को बिटटोरेंट पर 350,000 से अधिक बार डाउनलोड किया गया था और डाउनलोड का दो तिहाई भारत के भीतर के स्थानों पर खोजा जा सकता था। 15 अध्ययन

दावा है कि बॉलीवुड फिल्मों की अवैध डाउनलोडिंग ज्यादातर से होती है

दिल्ली, बैंगलोर और मुंबई।16

एमपीए अध्ययन उपयोग के संबंध में कुछ दिलचस्प अनुमान भी लगाता है

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भारत में पायरेसी के लिए साइबरलॉकर्स की। यह उल्लेख करता है कि “[ई] विजनल विश्वास

(जोर दिया गया) कि ऐसी साइटों के लगभग 2 मिलियन नियमित उपयोगकर्ता हैं

दुनिया भर में” और भारतीय साइबरलॉकर्स के सबसे बड़े उपयोगकर्ताओं में से एक हैं।17

8. आईडी। 10 पर। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि उन्होंने एलेक्सा का उपयोग करके यह विश्लेषण किया, one

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विभिन्न वेबसाइटों के वेब ट्रैफ़िक डेटा प्रदान करने वाली वेब-सेवाओं के बारे में।

9. आईडी। 11 बजे।

10. उन्होंने जिन छह हॉलीवुड फिल्मों को ट्रैक किया, वे हैं ट्रांसफॉर्मर: रिवेंज ऑफ द

फॉलन, द प्रपोजल, एंजल्स एंड डेमन्स, स्टार ट्रेक, नाइट एट द म्यूजियम और द डार्क

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शूरवीर। पहचान। 31 पर। यहां यह ध्यान दिया जा सकता है कि फिल्मों के चयन के लिए उपयोग किया जाने वाला तर्क है

अध्ययन में उल्लेख नहीं है।

11. आईडी. 13 बजे

12. आईडी। 14. अध्ययन में उल्लेख किया गया है कि 7 मिलियन ब्रॉडबैंड ग्राहकों में से 0.76%

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भारत ने चार के दौरान छह पायरेटेड फिल्मों में से कम से कम एक को डाउनलोड करने का पता लगाया था

सप्ताह की निगरानी अवधि। अध्ययन में उल्लेख किया गया है कि कनाडा में इसका अनुपात 0.7% था,

ग्रेट ब्रिटेन में 0.5%, ऑस्ट्रेलिया में 0.44% और अमेरिका में 0.18%। पहचान।

13. आईडी। 18-19 पर। मॉनिटर की गई फिल्में हैं रब ने बना जोड़ी, लक, लव आज कल

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और कामिनी। अध्ययन में इन चारों के चयन के पीछे के कारणों का उल्लेख नहीं है

चलचित्र।

14. आईडी। 19 बजे

15. यह भी देखें, ऑनलाइन पायरेसी में शीर्ष 10 में भारत; टेलीविजन, फिल्म उद्योग को झटका,

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वित्तीय एक्सप्रेस, सुप्रा नोट 4.

16. आईडी। 18-19 पर। यह भी देखें, ऑनलाइन पाइरेसी भारतीय फ़िल्मों के लिए एक वास्तविक ख़तरा है और

टेलीविजन उद्योग, मोशन पिक्चर्स एसोसिएशन एशिया पैसिफिक-पैसिफिक प्रेस विज्ञप्ति,

सुप्रा नोट 4.

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17. एनविज़नल एंड मोशन पिक्चर्स एसोसिएशन, इंडिया, सुप्रा नोट 6, 25 बजे।

2013] भारतीय फिल्मों की ऑनलाइन पायरेसी 651

उनके डेटा के अनुसार, भारतीय उपयोगकर्ता 8.2% आगंतुकों का गठन करते हैं

दुनिया में शीर्ष दस साइबरलॉकर।18

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लेकिन डेटा की व्याख्या करते समय विचार करने के लिए कुछ कारक हैं

एमपीए अध्ययन और साथ ही मीडिया रिपोर्टों की भारी संख्या के आधार पर

उस अध्ययन के निष्कर्ष। उनमें से सबसे महत्वपूर्ण की कमी है

में कई अनुमानों के लिए उपयोग की जाने वाली कार्यप्रणाली में पारदर्शिता

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अध्ययन.19 यह इसे दोहराना, यदि असंभव नहीं है, तो कठिन बना देता है

डेटा के सत्यापन के लिए प्रयोग। दूसरा, के संबंध में डेटा

विभिन्न टोरेंट साइटों पर आगंतुकों का प्रतिशत बहुत सब्सक्राइब किया जाना है

सावधानी से। उदाहरण के लिए, इस लेखक ने विश्लेषण को दोहराने का प्रयास किया

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विभिन्न लोकप्रिय वेबसाइटें, एक ही डेटा स्रोत (एलेक्सा) का उपयोग करके, जिसका उल्लेख किया गया है

एमपीए अध्ययन। दिलचस्प है, यहां तक ​​कि amazon.com जैसी वेबसाइटों के लिए भी, जो

अभी तक भारत में व्यावसायिक उपस्थिति नहीं है, एलेक्सा डेटा आगंतुकों को दिखाता है

भारत से दूसरे सबसे बड़े समूह के रूप में।20 यह स्पष्ट रूप से इस तथ्य को इंगित करता है कि

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वेबसाइट तक पहुंच के उद्देश्य के बारे में कोई वैध निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता है,

केवल उस वेबसाइट पर आगंतुकों के अनुपात के डेटा से। तीसरा,

डाउनलोड करने पर डेटा के संबंध में, अध्ययन महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में चुप है

जैसे अनुमानों के लिए उपयोग की जाने वाली कार्यप्रणाली, विश्लेषण की समय अवधि और उपकरण

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ट्रैकिंग के लिए उपयोग किया जाता है, जिससे इसे सत्यापित करना या दोहराना असंभव हो जाता है

अध्ययन। अंत में, साइबरलॉकर्स पर डेटा के संबंध में, यह ध्यान दिया जा सकता है कि

साइबरलॉकर्स के भी कई वैध उपयोग हैं और यह कल्पना करना कठिन है कि सभी

वे जो साइबरलॉकरों का दौरा करते थे (यहां तक ​​​​कि एक पल के लिए यह मानते हुए कि उनका डेटा

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आगंतुकों के संबंध में सटीक थे) अवैध फ़ाइल के लिए उनसे मिलने जा रहे हैं

अभिगम। संक्षेप में, भारत में ऑनलाइन पायरेसी पर डेटा, द्वारा प्रदान किया गया

फिल्म उद्योग को सावधानी से अपनाने की जरूरत है और फिल्म उद्योग को कोशिश करनी चाहिए

भविष्य के अध्ययन में कार्यप्रणाली को और अधिक पारदर्शी बनाना।

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भारत में पायरेसी की प्रकृति और के रवैये पर डेटा की कमी

भारत में लोगों ने पायरेसी के प्रति इस लेखक को प्रेरित किया था कि

भारत में स्वतंत्र अनुभवजन्य सर्वेक्षण, उनके डॉक्टरेट अनुसंधान के भाग के रूप में।

स्ट्रीमिंग और डाउनलोडिंग दोनों में, ऑनलाइन पायरेसी के लिए उपभोक्ताओं का एक्सपोजर

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फिल्में, इस संबंध में खोजे गए महत्वपूर्ण आयामों में से एक थी। NS

अनुभवजन्य सर्वेक्षण अगस्त के महीनों के दौरान आयोजित किया गया था और

सितंबर 2010 में पेंसिल-एंड-पेपर आधारित प्रश्नावली का उपयोग करना।21

भारत की विविधता पर कब्जा करने की दोहरी चुनौती का सामना करने के लिए और

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18. आईडी। 26 बजे।

19. आम तौर पर देखें,

काल्पनिक और गति चित्र संघ, भारत, सुप्रा नोट

6.

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20. शीर्ष तीन देशों से www.amazon.com पर आगंतुकों का प्रतिशत

प्रयोग का डेटा इस प्रकार पाया गया – यूएस: 63.5%, भारत: 3.2%, और यूके: 2.8%। देखो

AMAZON.COM के लिए सांख्यिकी सारांश, http://www.alexa.com/siteinfo/amazon.com (अंतिम)

21 जनवरी, 2011 का दौरा किया)।

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21. हालांकि वेब-आधारित सर्वेक्षण कहीं अधिक सुविधाजनक और प्रबंधन में आसान हैं, यह

इस अध्ययन में टाला जाना था, क्योंकि अधिकांश स्नातक शिक्षण संस्थानों में

भारत, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में, अपने छात्रों को संस्थान के आधार पर प्रदान नहीं करते हैं

ईमेल पते या अपने छात्रों के ईमेल पते के किसी भी डेटाबेस को बनाए रखना।

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652 मिशिगन स्टेट इंटरनेशनल लॉ रिव्यू [वॉल्यूम। 21:3

भारत के सभी भागों में एक ही प्रश्नावली का प्रशासन,

सर्वेक्षण में प्रयुक्त नमूनाकरण विधि स्तरीकृत उद्देश्यपूर्ण नमूनाकरण थी,

जो उद्देश्यपूर्ण नमूने की श्रेणी को संदर्भित करता है जो उपसमूहों को दर्शाता है और तुलना की सुविधा प्रदान करता है। 22 सर्वेक्षण के बीच आयोजित किया गया था

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अध्ययन की चार अलग-अलग धाराओं (कला, विज्ञान,

कानून, और प्रौद्योगिकी) तीन प्रकार के स्थानों में स्थित संस्थानों में

(शहर, कस्बे और गाँव)। 23 जबकि एक छात्र के नमूने का उपयोग अक्सर लाता है

बाहरी वैधता के संबंध में सीमाओं में, यह काफी हद तक मददगार था

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यह अध्ययन, क्योंकि छात्र के सबसे महत्वपूर्ण खंडों में से एक का गठन करते हैं

भारत में मूवी उपभोक्ता। 24 छात्र भी आम तौर पर उनके साथ होते हैं

प्रौद्योगिकी के लिए सबसे अधिक जोखिम, लेकिन पहुंच के लिए सीमित वित्तीय संसाधन

वैध चैनलों में फिल्में। कुल 600 प्रश्नावली थे

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सर्वेक्षण के हिस्से के रूप में विभिन्न परिसरों में वितरित, और 491 प्रतिक्रियाएं

प्राप्त हुए थे। 25

अनुभवजन्य सर्वेक्षण के डेटा से संबंधित दिलचस्प पहलुओं का पता चलता है

ऑनलाइन पायरेसी के लिए भारतीय समाज का एक्सपोजर। कोई सबसे पहले देख सकता है

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पायरेटेड फिल्मों की स्ट्रीमिंग के संपर्क में आने के संबंध में डेटा। केवल कुल

27.99% उत्तरदाताओं ने कम से कम एक पायरेटेड स्ट्रीम किया पाया गया है

सर्वेक्षण से पहले के तीन महीनों के दौरान फिल्म, जिससे यह संकेत मिलता है कि

पायरेटेड फिल्मों की स्ट्रीमिंग अभी तक भारत में व्यापक रूप से प्रचलित नहीं है। पर डेटा

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पायरेटेड फिल्में डाउनलोड करने से पता चलता है कि केवल 30.23% उत्तरदाताओं के पास है

एक ही समय अवधि के दौरान कम से कम एक पायरेटेड मूवी डाउनलोड की। एक

इन आंकड़ों की तुलना उन उत्तरदाताओं के प्रतिशत से कर सकते हैं जो

के दौरान कम से कम एक पायरेटेड मूवी वीसीडी/डीवीडी देखी गई पाई गई

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विश्लेषण की समान समयावधि- 53.94%। यह इंगित करता है कि मूवी पायरेसी in

भारत में अभी भी ऑफलाइन चैनलों का दबदबा है।

ऑनलाइन पायरेसी पर डेटा का स्पष्ट विश्लेषण कुछ प्रदान करता है

महत्वपूर्ण अतिरिक्त अंतर्दृष्टि। उदाहरण के लिए, श्रेणीबद्ध विश्लेषण के आधार पर

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उत्तरदाताओं के स्थान के प्रकार से पता चलता है कि ऑनलाइन पायरेसी का जोखिम

भारत में ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी क्षेत्रों में काफी अधिक है।

जबकि उत्तरदाताओं का 41.74% शहरी वर्ग से और 33.08%

22. स्तरीकृत उद्देश्यपूर्ण नमूने पर विस्तृत चर्चा के लिए, मैथ्यू बी माइल्स देखें

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और माइकल ह्यूबरमैन, गुणात्मक डेटा विश्लेषण: एक विस्तारित स्रोत पुस्तक 28

(ऋषि प्रकाशन 1994)। सभी में एकल प्रश्नावली को प्रशासित करने के लिए सबसे बड़ी चुनौती

भारत के कुछ हिस्सों में भारत में विशाल भाषाई विविधता है।

23. इस प्रक्रिया में पद्धतिगत कठोरता सुनिश्चित करने के लिए ‘गांव’ की परिभाषा,

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भारत की जनगणना 2001 में ‘कस्बों’ और ‘शहरों’ का अनुसरण किया गया था, जिन्हें पहचानने के लिए अपनाया गया था

विभिन्न प्रकार के स्थान।

24. बॉलीवुड फिल्मों के लिए घरेलू नाट्य राजस्व का 50% से अधिक है

18-30 आयु वर्ग के लोगों से प्राप्त। अभिलाषा ओझा और गौरी शाह, बॉलीवुड

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प्रोडक्शन हाउस टारगेट यूथ टू स्क्रिप्ट सक्सेस, लाइवमेंट, मई 27, 2011, उपलब्ध है

वेस्टलॉ।

25. उनमें से चौदह को प्रारंभिक जांच के बाद खारिज करना पड़ा। के बीच में

चौदह को छोड़ दिया गया, छह को त्याग दिया गया क्योंकि वे स्नातकोत्तर छात्रों से थे और आठ

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खारिज कर दिया गया क्योंकि उन उत्तरदाताओं ने कभी फिल्में नहीं देखीं। के आधार पर इनकी पहचान की गई

प्रश्नावली में शामिल स्क्रीनिंग प्रश्नों के प्रति उनकी प्रतिक्रिया के संबंध में।

2013] भारतीय फिल्मों की ऑनलाइन पायरेसी 653

नगर श्रेणी के उत्तरदाताओं ने कम से कम एक

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पिछले तीन महीनों के दौरान पायरेटेड फिल्म, केवल 12.41%

ग्राम वर्ग के उत्तरदाताओं को इसमें संलग्न पाया गया है

समान समयावधि के दौरान समान। 26 इसी तरह, जबकि के 49.23% के रूप में उच्च

नगर श्रेणी के उत्तरदाताओं और से 33.33 प्रतिशत उत्तरदाताओं

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शहर की श्रेणी पायरेटेड फिल्में डाउनलोड करने में लगी हुई पाई गई है

विश्लेषण की समान अवधि के दौरान, उत्तरदाताओं का केवल 10.49%

उसी में लगे ग्राम वर्ग से।27

शैक्षिक पृष्ठभूमि पर आधारित श्रेणीबद्ध विश्लेषण से पता चलता है कि

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ऑनलाइन पायरेसी का जोखिम अलग-अलग लोगों के बीच काफी भिन्न होता है

शैक्षिक पृष्ठभूमि। ऑनलाइन पायरेसी का एक्सपोजर सबसे ज्यादा पाया जाता है

प्रौद्योगिकी पृष्ठभूमि से उन लोगों में से। जबकि 31.07%

प्रौद्योगिकी पृष्ठभूमि के छात्रों को यहां स्ट्रीम किया गया पाया गया है

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कम से कम एक पायरेटेड

सर्वेक्षण से पहले के तीन महीनों के दौरान फिल्म, केवल

विज्ञान पृष्ठभूमि के 17.19% छात्रों में एक जैसा पाया गया

जोखिम.28 इसी तरह, जबकि उत्तरदाताओं के 50.93% के रूप में उच्च के रूप में

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यह पाया गया है कि प्रौद्योगिकी पृष्ठभूमि में कम से कम एक पायरेटेड डाउनलोड किया गया है

सर्वेक्षण से पहले के तीन महीनों के दौरान फिल्म, केवल 11.11%

विज्ञान पृष्ठभूमि के उत्तरदाताओं को इसमें संलग्न पाया गया है

वही.29

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लिंग के आधार पर डेटा का श्रेणीबद्ध विश्लेषण काफी हद तक दिखाता है

ऑनलाइन पायरेसी में लिप्त पुरुषों का उच्च प्रतिशत, की तुलना में

मादा। जबकि 34.06% पुरुषों ने कम से कम एक . स्ट्रीम किया है

पिछले तीन महीनों के दौरान पायरेटेड फिल्म, केवल 16.89% महिलाएं

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एक ही समय अवधि के दौरान उसी में लगे पाए जाते हैं। 30

इसी तरह, जब कोई अवैध डाउनलोडिंग के डेटा को देखता है, तो यह दर्शाता है कि

38.5% पुरुषों ने इस दौरान कम से कम एक पायरेटेड मूवी डाउनलोड की है

पिछले तीन महीनों में, 17.93% महिलाओं की तुलना में।31

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26. विलकॉक्सन रैंक-सम टेस्ट से पता चलता है कि शहरों और के बीच अंतर

गाँव (z= 5.463, p<0.001) और कस्बों और गांवों के बीच अंतर (z=4.102,

p<0.001) सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण हैं।

27. विलकॉक्सन रैंक-सम टेस्ट से पता चलता है कि शहरों और कस्बों के बीच अंतर

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(z=-2.108, p=0.035), कस्बों और गांवों के बीच (z=7.1222, p<0.001) और शहरों के बीच और

गाँव (z=4.688, p<0.001) भी सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण हैं

28. विलकॉक्सन रैंक-सम टेस्ट से पता चलता है कि कला और विज्ञान के बीच अंतर

(z=2.177, p=0.03) और विज्ञान और प्रौद्योगिकी के बीच (z=-2.043, p=0.041) सांख्यिकीय रूप से हैं

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सार्थक।

29. कला और प्रौद्योगिकी के बीच अंतर (z=-3.930, p<0.001), बीच

विज्ञान और प्रौद्योगिकी (z=-5.186, p<0.001), कानून और प्रौद्योगिकी के बीच (z=-4.054,

p<0.001), कला और विज्ञान के बीच (z=2.463, p=0.014), और कानून और विज्ञान के बीच

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(z=1.983, p=0.047) विलकॉक्सन रैंक-सम टेस्ट में सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण पाए गए हैं।

30. विलकॉक्सन रैंक-सम टेस्ट से पता चलता है कि लिंग के बीच अंतर हैं

सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण (z=-3.641, p<0.001)।

31. विलकॉक्सन रैंक-सम टेस्ट से पता चलता है कि अंतर सांख्यिकीय रूप से हैं

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महत्वपूर्ण (z=-4.293, p<0.001)।

654 मिशिगन स्टेट इंटरनेशनल लॉ रिव्यू [वॉल्यूम। 21:3

संयुक्त पठन से दो महत्वपूर्ण पहलू विशेष रूप से दिखाई देते हैं

डेटा का। पहला, उन उत्तरदाताओं का प्रतिशत जिन्होंने ऑनलाइन कार्य किया है

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पायरेसी (पायरेटेड मूवी को स्ट्रीम करना या डाउनलोड करना) बहुत कम है जब

उन उत्तरदाताओं के प्रतिशत की तुलना में जिन्होंने ऑफ़लाइन कार्य किया है

पायरेसी (पायरेटेड मूवी वीसीडी/डीवीडी देखना)। यह के दावों को चुनौती देता है

उद्योग कि ऑनलाइन पायरेसी आज भारत में पर्याप्त है। ए . से डेटा

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केपीएमजी द्वारा हाल ही में किया गया एक अध्ययन, जिसमें बताया गया है कि भारत में पायरेसी

मुख्य रूप से लगभग 10,000 विक्रेताओं के माध्यम से प्रसारित किया जाता है, यह भी समर्थन करता है

वर्तमान सर्वेक्षण से पता चलता है। 32 इंटरनेट उपयोग से संबंधित डेटा,

विशेष रूप से इंटरनेट एक्सेस पॉइंट्स की प्रकृति और गति/लागत

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भारत में ब्रॉडबैंड कनेक्शन, इस संभावना की ओर भी इशारा करते हैं कि

ऑनलाइन पायरेसी भारत के भीतर पर्याप्त स्तर पर नहीं हो सकती है।33

दूसरा, जैसा कि डेटा के स्पष्ट विश्लेषण से स्पष्ट है, के संपर्क में

भारत के भीतर ऑनलाइन पायरेसी काफी भिन्न है। उदाहरण के लिए, डेटा के रूप में

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ऊपर वर्णित शो, शहरी क्षेत्रों के लोग और वहां के लोग

प्रौद्योगिकी पृष्ठभूमि में ऑनलाइन पायरेसी के लिए काफी अधिक जोखिम है।

इसी तरह, पुरुषों में ऑनलाइन के लिए काफी अधिक जोखिम पाया जाता है

महिलाओं की तुलना में चोरी। विविधता के और भी कई चेहरे हो सकते हैं

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जैसे आय, राज्य, भाषा, आदि। भारत में ऑनलाइन पायरेसी पर कोई डेटा कि

इस विविधता पहलू को छुपाता है जो केवल एक विकृत तस्वीर ला सकता है

चोरी विविधता पहलू भी अधिक ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता को दर्शाता है

उद्योग की ओर से अभियान, यदि उद्योग कम करना चाहता है

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भारत के भीतर ऑनलाइन चोरी।

अंत में, यह देखना भी महत्वपूर्ण है कि घरेलू नाट्य

भारतीय फिल्म उद्योग के राजस्व में कोई सहसंबद्ध कमी नहीं दिखती है

इंटरनेट कनेक्शन और इंटरनेट में वृद्धि के अनुरूप राजस्व

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भारत में उपयोगकर्ता। इसके विपरीत, फिल्म के लिए घरेलू नाट्य राजस्व

में वृद्धि के बावजूद उद्योग एक ऊपर की दिशा में आगे बढ़ते देखे जा रहे हैं

भारत में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या। उदाहरण के लिए, का कुल राजस्व

फिल्म उद्योग वर्ष 2010 में INR 83.3 बिलियन से बढ़कर INR . हो गया है

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वर्ष 2011.34 में 92.9 बिलियन उद्योग का भी अनुमान है

2011 से की अवधि के दौरान 10.1% की संयुक्त वार्षिक वृद्धि दर

2016.35 यहां तक ​​कि संगीत उद्योग, जिसे कई लोगों ने सबसे बड़े के रूप में चित्रित किया है

पाइरेसी का शिकार, भारत में राजस्व में वृद्धि की एक समान तस्वीर दिखाता है। NS

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भारतीय संगीत उद्योग ने से राजस्व में समग्र वृद्धि देखी है

32. हाई नोट्स हिटिंग: फिक्की-केपीएमजी भारतीय मीडिया और मनोरंजन उद्योग

रिपोर्ट 2011, केपीएमजी 63-64 (2011) [इसके बाद केपीएमजी], http://www.kpmg.com/IN/en/Issues

एंडइनसाइट्स/थॉट लीडरशिप/फिक्की-केपीएमजी-रिपोर्ट-2011.पीडीएफ।

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 33. में एक महत्वपूर्ण चर्चा के लिए इस संबंध में देखें अरुल जॉर्ज स्कारिया, क्या भारत को चाहिए

डिजिटल अधिकार प्रबंधन प्रावधान या बेहतर डिजिटल व्यवसाय प्रबंधन रणनीतियाँ?,

17 जे इंटेल। प्रॉप। आरटीएस। 463, 470-472 (2012)।

34. डिजिटल डॉन: द मेटामॉर्फोसिस बिगिन्स: फिक्की-केपीएमजी इंडियन मीडिया एंड

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मनोरंजन उद्योग रिपोर्ट 2012, केपीएमजी 61 (2012), http://www.kpmg.com/IN/en/Issues

एंडइनसाइट्स/थॉटलीडरशिप/रिपोर्ट-2012.पीडीएफ।

35. आईडी।

2013] भारतीय फिल्मों की ऑनलाइन पायरेसी 655

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वर्ष 2010 में INR 8.6 बिलियन से वर्ष 2011.36 में INR 9 बिलियन हो गया लेकिन

सबसे दिलचस्प कारक जो संयुक्त का विश्लेषण करते समय नोटिस कर सकता है

वर्ष 2007 से 2011 के दौरान संगीत उद्योग की वार्षिक वृद्धि है कि

भौतिक मीडिया की बिक्री में काफी कमी आई है (-17%)

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डिजिटल मीडिया (+39%) की बिक्री में भारी वृद्धि के साथ।37 यह

स्पष्ट रूप से उपभोक्ता वरीयताओं में एक बड़े बदलाव और में किसी भी गिरावट को दर्शाता है

संगीत में भौतिक मीडिया की बिक्री केवल परिवर्तन का संकेत दे सकती है

उपभोक्ता वरीयता।

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जबकि ऊपर की चर्चा निम्न की संभावनाओं की ओर अधिक इशारा करती है

भारत के भीतर ऑनलाइन मूवी पायरेसी की दरें, यह किसी भी तरह से सुझाव नहीं देता है

कि भारतीय फिल्मों की ऑनलाइन पायरेसी न के बराबर है। दरअसल, कोई भी सर्च इंजन

वेब पर फैली हजारों पायरेटेड भारतीय मूवी फ़ाइलें दिखा सकता है। में

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कई मामलों में, फिल्मों के पायरेटेड संस्करण भी ऑनलाइन जारी किए जाते हैं

उसी दिन या सिनेमाघरों में फिल्म की रिलीज के अगले दिन।38

जैसा कि अधिकांश अर्थशास्त्री सहमत होंगे, किसी उत्पाद की मांग में

लंबे समय में उस उत्पाद की आपूर्ति बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, और

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पायरेटेड फिल्मों के मामले में भी ऐसा ही होना चाहिए। यह की ओर जाता है

भारतीय पायरेटेड के प्राथमिक उपभोक्ता कौन हैं, इसका गूढ़ प्रश्न

फिल्में ऑनलाइन उपलब्ध हैं। जबकि भारतीय फिल्म उद्योग हमेशा से रहा है

भारत के भीतर फिल्म उपभोक्ताओं को लक्षित करते हुए, यह अध्ययन एक लेना चाहता है

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इस संबंध में अलग स्थिति, विशेष रूप से की पृष्ठभूमि के खिलाफ

अनुभवजन्य सर्वेक्षण के निष्कर्ष और इंटरनेट के उपयोग से संबंधित भी

भारत में सांख्यिकी। इस अध्ययन का विचार है कि इस बात की अधिक संभावना है कि

उन ऑनलाइन पायरेटेड उत्पादों के प्राथमिक उपभोक्ता लाखों भारतीय हैं

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विदेश में रहने वाले फिल्म उपभोक्ता। कुछ कारक हैं जो इसे बनाते हैं

इस परिकल्पना तक पहुँचें।

सबसे पहले, भारत उन देशों में से एक है जहां काफी बड़े प्रवासी हैं। NS

नवीनतम उपलब्ध आधिकारिक अनुमानों में रहने वाले भारतीयों की संख्या पर विचार किया गया है

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विदेशों में लगभग 22 मिलियन.39 क्षेत्र के भीतर रहने वाले अधिकांश भारतीयों की तरह

भारत के, विदेशों में रहने वाले भारतीय भी भारतीय के संभावित या नियमित उपभोक्ता हैं

चलचित्र। विदेशों में रहने वाले भारतीयों के अलावा, इस पर भी ध्यान देना चाहिए

भारतीय के गैर-भारतीय उपभोक्ताओं की काफी बड़ी संख्या को ध्यान में रखते हुए

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विदेशों में फिल्में, विशेष रूप से अन्य दक्षिण एशियाई और अरब देशों में। लेकिन जैसे

उद्योग के आंकड़ों से कोई भी नोटिस कर सकता है, भारतीय फिल्म के लिए विदेशी राजस्व

घरेलू राजस्व की तुलना में उद्योग अभी भी नगण्य हैं। 40 यह है

36. आईडी। 117 पर।

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37. आईडी।

38. इस संबंध में हालिया उदाहरणों में से एक फिल्म इंग्लिश विंग्लिश है, जो

भारत में 5 अक्टूबर 2012 को जारी किया गया था। देखें http://www.imdb.com/title/tt2181931/releasein

एफओ (17 अक्टूबर 2012 को एक्सेस किया गया)। इसके पायरेटेड संस्करणों के लिंक की भारी संख्या

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फिल्म अगले दिन, 6 अक्टूबर, 2012 से उपलब्ध थी।

39. मई 2012 तक के आंकड़े, http://moia.gov.in/writereaddata/pdf/NRISPI पर उपलब्ध

ओएस-डेटा%2815-06-12%29new.pdf (पिछली बार 17 अक्टूबर, 2012 को देखा गया)।

40. डिजिटल डॉन: फिक्की-केपीएमजी भारतीय मीडिया और मनोरंजन उद्योग रिपोर्ट

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2012, सुप्रा नोट 34, 63 पर।

656 मिशिगन स्टेट इंटरनेशनल लॉ रिव्यू [वॉल्यूम। 21:3

शायद ही कोई आश्चर्य की बात हो क्योंकि भारतीय फिल्म उद्योग अभी भी अपना ध्यान केवल सिनेमा तक ही सीमित रखता है

विदेशों से राजस्व के प्राथमिक स्रोत के रूप में जारी करता है।

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जबकि उद्योग ने वर्ष 2010 में घरेलू से 62 अरब रुपये कमाए

सिनेमा, विदेशी सिनेमा ने सिर्फ 6.6 अरब रुपये का योगदान दिया।41 इसी तरह,

जबकि उद्योग ने घरेलू से वर्ष 2011 में INR 68.8 बिलियन की कमाई की

सिनेमा, इसने विदेशी सिनेमाघरों से सिर्फ INR 6.9 बिलियन की कमाई की।42 एक मई

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यहां ध्यान दें कि विदेशों में सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली भारतीय फिल्मों की संख्या बहुत दूर है

भारत में निर्मित फिल्मों की संख्या और की संख्या की तुलना में कम

विदेश में रहने वाले संभावित उपभोक्ता। जबकि विदेशों में स्क्रीन की संख्या

जो बड़े बजट की फिल्में रिलीज होती हैं उनकी संख्या बढ़कर 400-500 स्क्रीन हो गई है

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वर्ष 2011 वर्ष 2010 में 250 स्क्रीनों से, स्क्रीनों की संख्या

मध्यम और छोटे बजट की फिल्मों के लिए लगभग 100-120 पर रहता है।43 The

विदेशों में सीमित संख्या में सिनेमा रिलीज के लिए एक विशेष रूप से गंभीर मुद्दा है

बॉलीवुड के अलावा भारत में क्षेत्रीय फिल्म उद्योगों की फिल्में।

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जबकि तमिल और तेलुगु जैसे कई क्षेत्रीय फिल्म उद्योग उत्पादन करते हैं

बड़ी संख्या में फिल्में, उनकी विदेशी सिनेमा रिलीज बहुत कम होती है जब

बॉलीवुड की तुलना में, इस तथ्य के बावजूद कि उनके पास भी समान है

विदेशों में (संभावित) उपभोक्ताओं की संख्या। 44

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किसी को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि अन्य वैध चैनल जो एक्सेस प्रदान करते हैं

विदेशों में उपभोक्ताओं के लिए भारतीय फिल्में आज भी सीमित हैं, इसके बावजूद

बहुत बड़ा पीओ 

बाजार की क्षमता और द्वारा प्रदान किए गए अवसर

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डिजिटल प्रौद्योगिकियां। पहले के समय में, बाजार की उपेक्षा हो सकती थी

उत्पादन में शामिल भारी लागतों के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है और

विदेशी बाजारों में फिल्म प्रिंट प्रसारित करना और परिणामी वित्तीय जोखिम

निर्माताओं को करना पड़ा। 45 लेकिन ऐसे बहाने आज मौजूद नहीं हैं

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उपभोक्ताओं तक पहुंचने के लिए वर्तमान डिजिटल प्रौद्योगिकियों की संभावनाओं को देखते हुए

सीधे उचित लागत पर। पहले के समय में, समुद्री लुटेरे खेला करते थे

भारतीय फिल्मों को उपेक्षित विदेशों तक पहुंचाने में अहम भूमिका

वीडियो कैसेट और “भारतीय” जैसी प्लेबैक तकनीकों के माध्यम से बाजार

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विदेशों में किराने की दुकानों की मध्यस्थ चैनल के रूप में एक प्रमुख भूमिका थी।46

हालाँकि, इंटरनेट और ऑनलाइन साझाकरण प्लेटफार्मों के उद्भव के साथ,

41. आईडी।

42. आईडी।

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43. 2011 के अनुसार डेटा। आईडी।

44. 2011 के फिल्म प्रमाणन डेटा के अनुसार, 192 तेलुगु फिल्में और 185 तमिल

फिल्मों को वर्ष 2011 में रिलीज के लिए प्रमाणित किया गया था। इसकी तुलना 206 बॉलीवुड से की जा सकती है

एक ही समय अवधि के दौरान प्रमाणित फिल्में। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड,

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वार्षिक रिपोर्ट 2011, 18, http://cbfcindia.gov.in/html/uniquepage.aspx?unique पर उपलब्ध

_page_id=30 (पिछली बार 18 अक्टूबर 2012 को देखा गया)।

45. एड्रियन मैबॉट एथिक, द ग्लोबल डायनेमिक्स ऑफ़ इंडियन मीडिया पाइरेसी: एक्सपोर्ट

बाजार, प्लेबैक मीडिया और अनौपचारिक अर्थव्यवस्था, 30 मीडिया, संस्कृति और समाज 699, 703

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(2008); एड्रियन मैबॉट एथिक, बॉलीवुड और ‘किराना स्टोर’ वीडियो पाइरेसी भी देखें

ऑस्ट्रेलिया, 121 मीडिया इंटल ऑस्ट्रेलिया 41, 41 (2006)।

46. ​​आम तौर पर अतीक, बॉलीवुड और ‘किराना स्टोर’ वीडियो पाइरेसी देखें

ऑस्ट्रेलिया, सुप्रा नोट 45 (‘किराने की दुकान’ आधारित पायरेसी पर एक दिलचस्प चर्चा प्रदान करते हुए)

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ऑस्ट्रेलिया में भारतीय फिल्मों की)।

2013] भारतीय फिल्मों की ऑनलाइन पायरेसी 657

केवल एक बड़ा बदलाव जो हुआ है, वह है उनका प्रतिस्थापन

बिचौलिये काफी हद तक, क्योंकि समुद्री डाकू अधिकांश उपभोक्ताओं तक पहुंच सकते हैं

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सीधे अब। यह तब तक जारी रह सकता है जब तक फिल्म उद्योग इसकी उपेक्षा नहीं करता

विदेशों में उपभोक्ताओं तक पहुंचने के लिए डिजिटल अवसर।

तक पहुँच प्रदान करने वाली कुछ प्रमुख वेबसाइटों का सावधानीपूर्वक विश्लेषण

पायरेटेड भारतीय फिल्में भी इस दृष्टिकोण का समर्थन करती हैं कि के प्राथमिक दर्शक

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इनमें से अधिकांश वेबसाइटें विदेश में रहने वाले उपभोक्ता हैं, न कि भीतर रहने वाले उपभोक्ता

India.47 इसमें देखे गए तीन कारकों का विशेष रूप से उल्लेख करने की आवश्यकता है:

संबद्ध। सबसे पहले, चैट में चर्चा की प्रकृति और विषयों का विश्लेषण

कई ऑनलाइन पायरेटेड मूवी पोर्टल्स में फ़ोरम दिखाते हैं कि फ़ोरम हैं

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अनिवासी भारतीयों का प्रभुत्व।48 दूसरा, व्यवसाय मॉडल द्वारा उपयोग किया जाता है

अधिकांश होस्टिंग वेबसाइटें दिखाती हैं कि वे विदेशों से संचालित हो रही हैं,

मुख्य रूप से दर्शकों से दान पर।

49 उदाहरण के लिए, दोनों को भुगतान

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पायरेटेड प्रतियों के योगदानकर्ता और दान के लिए अनुरोध

उपभोक्ता (उन पायरेटेड प्रतियों में से) यू.एस. डॉलर में हैं और भारतीय में नहीं हैं

रुपये.50 यदि उन फिल्मों के प्राथमिक उपभोक्ता रहने वाले थे

भारत के भीतर, लेनदेन भारतीय रुपये में होता, जैसे

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विदेशी मुद्राओं में लेनदेन किसके द्वारा उच्च स्तर की निगरानी के अधीन हैं?

भारत में केंद्रीय बैंक। तीसरा, IP पतों का स्थान विश्लेषण

लोकप्रिय पायरेटेड भारतीय मूवी वेबसाइटें दिखाती हैं कि उनमें से अधिकांश स्थित हैं

भारत के बाहर, जिनमें से अधिकांश यू.एस.51 में हैं, अंत में, जब कोई इन्हें पढ़ता है

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पहले चर्चा किए गए अनुभवजन्य सर्वेक्षण के आंकड़ों के संदर्भ में तथ्य,

जो दर्शाता है कि भारत के भीतर उपभोक्ताओं का ऑनलाइन पाइरेट्स के संपर्क में आना

ऑफ़लाइन समुद्री डाकू मीडिया की तुलना में मीडिया न्यूनतम है, इससे पता चलता है कि

इस बात की प्रबल संभावना है कि ऑनलाइन पायरेटेड फिल्मों के प्राथमिक उपभोक्ता हैं

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विदेशों में रहने वाले भारतीय फिल्म उपभोक्ता न कि भारत के भीतर रहने वाले।

द्वितीय. ऑनलाइन चोरी के खिलाफ कानूनी उपायों की प्रभावशीलता

जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है, फिल्म उद्योग हमेशा एक शक्तिशाली रहा है

भारत में विधायी प्रक्रिया में पैरवी समूह, दोनों राष्ट्रीय और

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राज्य स्तर। जबकि भारत के संविधान में विधायी निहित है

भारत की संसद के साथ कॉपीराइट संबंधी मामलों पर सक्षमता,

भारत में विभिन्न क्षेत्रीय फिल्म उद्योग जबरदस्ती करने में सफल रहे हैं

कॉपीराइट के विषय पर कानून बनाने के लिए कई राज्य विधायिकाएं

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47. स्कारिया, सुप्रा नोट 33, 471 पर भी देखें।

48. देखें, उदाहरण के लिए, MALLUVISION.ORG, चैट फोरम, (पिछली बार 2 फरवरी, 2010 को देखा गया), www.mallu

विजन डॉट ओआरजी।

49. आईडी।

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50. आईडी।

51. आईपी एड्रेस.ओआरजी, www.ip-address.org (पिछली बार 19 जनवरी 2013 को देखा गया)। देखें, उदा.,

स्ट्रीमिंग बॉलीवुड, www.streamingbollywood.com; हिन्दी-MOVIE.ORG, www.hindimovie.org; इंडिया टर्मिनल, www.indianterminal.com।

658 मिशिगन स्टेट इंटरनेशनल लॉ रिव्यू [वॉल्यूम। 21:3

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अप्रत्यक्ष पथ.52 राज्य स्तर पर कई समुद्री डकैती विरोधी कानून, जिनमें शामिल हैं

जो संदिग्ध उल्लंघनकर्ताओं के निवारक निरोध की अनुमति देते हैं, उन्हें स्पष्ट करें

इसमें राज्य स्तर पर विभिन्न क्षेत्रीय फिल्म उद्योगों की पैरवी करने की शक्ति

संबंध।53 लेकिन नए डीआरएम प्रावधान फिल्म उद्योग की ताकत दिखाते हैं

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राष्ट्रीय स्तर पर।54

कॉपीराइट (संशोधन) अधिनियम 2012 ने दो डीआरएम प्रावधान जोड़े।55

पहला प्रावधान pr . से संबंधित है

की हेराफेरी के खिलाफ विरोध

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तकनीकी उपाय। इस प्रावधान के अनुसार यदि कोई व्यक्ति

के उद्देश्य के लिए उपयोग किए जाने वाले एक प्रभावी तकनीकी उपाय को बाधित करता है

कॉपीराइट अधिनियम के तहत प्रदत्त किसी भी अधिकार की रक्षा करना,

ऐसे अधिकारों का उल्लंघन करने के इरादे से, उसे दंडित किया जाएगा

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कारावास जो दो साल तक का हो सकता है और इसके अधीन भी होगा

एक मौद्रिक जुर्माना के लिए। 56 दूसरा प्रावधान अधिकारों के संरक्षण से संबंधित है

प्रबंधन की जानकारी और इस प्रावधान के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति

बिना किसी अधिकार प्रबंधन जानकारी को जानबूझकर हटाता है या बदलता है

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प्राधिकरण, उस पर जुर्माना लगाया जाएगा और दो साल तक की कैद होगी। 57

इसी तरह की सजा उन व्यक्तियों के लिए भी निर्धारित है जो वितरित करते हैं, आयात करते हैं

जनता के लिए वितरण, प्रसारण या संचार के लिए, किसी भी काम की प्रतियां

या अधिकार के बिना प्रदर्शन, यह जानते हुए कि अधिकार प्रबंधन

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सूचना को बिना अधिकार के हटा दिया गया है या बदल दिया गया है।58 नया

प्रावधान यह भी विशेष रूप से उल्लेख करते हैं कि प्रदान किए गए आपराधिक उपचार हैं

कॉपीराइट कानून के तहत पहले से ही प्रदान किए गए नागरिक उपचार के अलावा

ऐसे कार्यों में कॉपीराइट स्वामी।59

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जैसा कि संसद में भी इन प्रावधानों पर बहस से स्पष्ट है

में पेश किए गए विधेयक में उद्देश्यों और कारणों के विवरण के रूप में

संसद, नए प्रावधानों का प्राथमिक उद्देश्य संघर्ष कर रहे थे

डिजिटल पायरेसी और डब्ल्यूआईपीओ में भारत की सदस्यता को सुगम बनाना कॉपीराइट

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52. कला देखें। भारत के संविधान के 246 और सातवीं अनुसूची की सूची – I

भारत का संविधान।

53. देखें, उदाहरण के लिए, केरल असामाजिक गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 2007, संख्या 34, के अधिनियम

संसद, 2007 (भारत)। व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए कॉपीराइट पायरेसी के अंतर्गत आता है

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‘असामाजिक गतिविधियों’ के दायरे में आता है और इस तरह की गतिविधियों में लिप्त व्यक्ति भीतर आता है

एक ‘गुंडा’ की परिभाषा, एक शब्द जो आमतौर पर अत्यधिक असामाजिक को संदर्भित करने के लिए प्रयोग किया जाता है

समाज में तत्व। पहचान। सेक। 2(एच) कॉपीराइट समुद्री डाकू को परिभाषित करता है, सेक। 2(ए) असामाजिक को परिभाषित करता है

गतिविधि और सेक। 2(जे) गुंडा को परिभाषित करता है। यह कानून ऐसे व्यक्तियों को हिरासत में लेने की अनुमति देता है

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6 महीने तक की अवधि। सेक देखें। अधिनियम के 12. टी. प्रशांत रेड्डी और एन. साईं भी देखें

विनोद, में निवारक निरोध के माध्यम से “वीडियो चोरी” को रोकने की संवैधानिकता

भारतीय राज्य, 7 जे। इंटेल। प्रॉप। एल और पीआरएसी। 194, 194-204 (2012)।

54. भारत में नए डीआरएम प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा के लिए देखें तरुण

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कृष्णकुमार और कौस्तव साहा, भारत का नया कॉपीराइट कानून: अच्छा, बुरा और डीआरएम,

8 जे इंटेल। प्रॉप। एल और पीआरएसी। 15, 15-17 (2013)। स्कारिया देखें, सुप्रा नोट 33, 463-477 पर।

55. देखें कॉपीराइट (संशोधन) अधिनियम, 2012 की संख्या 27, भारत कोड (2012)(सेक।

37)।

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56. कॉपीराइट अधिनियम, 1957 का 14, इंडिया कोड (1957) (धारा 65 (ए) (1)) देखें।

57. आईडी। सेक में 65बी (आई).

58. आईडी। सेक में 65बी(ii)।

59. आईडी। प्रोविसो से सेक तक। 65बी.

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2013] भारतीय फिल्मों की ऑनलाइन पायरेसी 659

संधि (WCT) और WIPO कलाकार और फोनोग्राम संधि

(डब्ल्यूपीपीटी) 60 जैसा कि बहसों से पता चलता है, मसौदाकारों का प्राथमिक तर्क

नया प्रावधान यह था कि भारतीय कॉपीराइट कानून का सामंजस्य

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भारत के विस्तार के लिए दो WIPO इंटरनेट संधियाँ आवश्यक और वांछनीय थीं

इंटर-कनेक्टेड डिजिटल में कॉपीराइट सामग्री के लिए पर्याप्त सुरक्षा

विश्व.61

के संदर्भ में नए डीआरएम प्रावधानों को देखने का भी प्रयास करना चाहिए

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भारत में न्यायपालिका द्वारा पहले से ही अत्यधिक व्यापक दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है

ऑनलाइन पायरेसी के संबंध में। उनमें से सबसे महत्वपूर्ण व्यापक प्रसार है

जॉन डो के आदेशों का उपयोग (या भारतीय न्यायिक में अशोक कुमार के आदेश

के संभावित प्रभाव पर पर्याप्त ध्यान दिए बिना)

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वैध इंटरनेट उपयोगों और उपयोगकर्ताओं पर ऐसे आदेश। जॉन डो ऑर्डर शब्द

उन आदेशों को संदर्भित करता है जहां उस समय प्रतिवादियों की पहचान अज्ञात होती है

याचिका दायर करने और आदेशों के द्वारा ही प्रतिवादियों की पहचान होती है

कुछ विवरण के।62 भारतीय फिल्म उद्योग में निर्माता बनाते हैं

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ऑनलाइन पायरेसी के खिलाफ न्यायिक हस्तक्षेप के इस रूप का व्यापक उपयोग

नई फिल्मों की रिलीज से पहले ऐसे आवेदन दाखिल करना।63 जबकि जॉन डो

आदेश केवल सबसे आवश्यक और सख्त के तहत दिए जाने चाहिए

वैध उपयोगों/उपयोगकर्ताओं पर इसके संभावित प्रभाव को देखते हुए कई शर्तें

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भारत में उच्च न्यायालयों को बिना किसी आदेश के ऐसे आदेश देते देखा जा सकता है

वैध ऑनलाइन उपयोग और इंटरनेट की सुरक्षा के लिए एहतियाती उपाय

उपयोगकर्ता। सही धारक व्यापक रूप से शब्दों वाले जॉन डो ऑर्डर का उपयोग एक उपकरण के रूप में करते हैं

इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (आईएसपी) को पूरी वेबसाइटों को ब्लॉक करने के लिए मजबूर करना

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ऑनलाइन पायरेटेड सामग्री तक पहुंच या लिंक प्रदान करने का संदेह है और

ISP अक्सर अधिकार धारकों के ऐसे दबाव के आगे झुक जाते हैं, जिसके डर से

60. कॉपीराइट (संशोधन) अधिनियम, सुप्रा नोट 55, 14-15 पर; राज्यसभा भी देखें,

शब्दशः वाद-विवाद (17 मई 2012, 20:00 अपराह्न से 21:00 अपराह्न), 3-4, http://164.100.47 पर उपलब्ध

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.5/newdebate/225/17052012/20.00pmTo21.00pm.pdf (पिछली बार 27 मई 2012 को देखा गया)।

61. आईडी। 4 पर।

62. तनुश्री संगल, भारत में मीडिया और मनोरंजन उद्योग में पायरेसी:

स्टेमिंग द मेनेस, 20 ईएनटी. एल. आर. 82, 85 (2009)। जबकि इस तरह के न्यायिक हस्तक्षेप हो सकते हैं

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कई अन्य न्यायालयों में भी पाया जाता है, भारत में इस तरह के दृष्टिकोण की कानूनी जड़ों का पता लगाया जा सकता है

वर्ष 2002 में वापस, जिसमें दिल्ली के उच्च न्यायालय ने इसे रोकने के लिए एक आदेश जारी किया था

विश्व कप 2002 का अवैध प्रसारण। देखें प्रवीण आनंद और निखिल कृष्णमूर्ति,

भारत: परिवर्तन की स्थिति में व्यापार चिह्न, इंटेल का प्रबंधन। प्रस्ताव, (1 जनवरी, 2003),

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http://www.managingip.com/Article/1321770/India-Trade-marks-in-a-state-of-change.html।

63. देखें, उदाहरण के लिए, स्वाति देशपांडे, फिल्म को पायरेसी के खिलाफ HC शील्ड मिलती है, द टाइम्स ऑफ़

भारत, (16 जून, 2012), http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2012-06-16/mumbai/3226

8729_1_एचसी-शील्ड-फ़िल्म-जॉन-डो; वसुधा वेणुगोपाल, इंटरनेट यूजर्स ब्लॉक करने पर भड़के

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फ़ाइल साझा करने वाली साइटों की, द हिंदू, (मई 18, 2012), http://www.thehindu.com/news/cities/chen

नाइ/आर्टिकल3429836.ece; प्रशांत रेड्डी, मद्रास उच्च न्यायालय ने अपना पहला ‘जॉन डो’ पारित किया

आदेश, स्पाइसी इंटेल। प्रॉप। ब्लॉग (मार्च 30, 2012, 2:36 पूर्वाह्न), http://spicyipindia.blogspot.be/2

012/03/madras-high-court-passes-its-first-ever.html; एक्सप्रेस समाचार सेवाएं – चेन्नई,

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मटर्रान के लिए राहत, द न्यू इंडियन एक्सप्रेस, (अक्टूबर.13, 2012), http://newindianexpress.co

मी/एंटरटेनमेंट/तमिल/आर्टिकल 1297176.ece.

660 मिशिगन स्टेट इंटरनेशनल लॉ रिव्यू [वॉल्यूम। 21:3

अदालत के आदेशों का उल्लंघन। 64 इसने कई बार वैध को प्रभावित किया है

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इंटरनेट का उपयोग करता है। 65

जबकि यह एक सच्चाई है कि पायरेटेड भारतीय की व्यापक उपलब्धता है

मीडिया उत्पाद ऑनलाइन, न तो नए DRM प्रावधानों द्वारा अधिनियमित

संसद और न ही जॉन डो भारतीय न्यायपालिका के आदेश समाधान हैं

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ऐसी पायरेसी को। इसमें दो महत्वपूर्ण पहलुओं को ध्यान में रखा जा सकता है

इस संबंध में। पहले, जैसा कि पिछले खंड में चर्चा की गई है, यदि प्राथमिक

ऑनलाइन पायरेटेड भारतीय फिल्मों के उपभोक्ता और होस्ट ज्यादातर विदेश में हैं,

भारतीय कॉपीराइट कानून के तहत डीआरएम प्रावधानों का अधिनियमन कभी नहीं होगा

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कॉपीराइट की क्षेत्रीय सीमाओं को ध्यान में रखते हुए ऐसी पायरेसी का समाधान

कानून। कॉपीराइट कानून की समान क्षेत्रीय सीमाएं भी की पहुंच को सीमित करती हैं

John Doe भारत में इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को आदेश देता है। दूसरा और

इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि विदेशों में भारतीय फिल्मों के उत्पादों की पायरेसी मुख्य रूप से है

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उन बाजारों की सेवा करने के लिए भारतीय फिल्म उद्योग की विफलता के कारण

वैध उत्पादों के साथ। उदाहरण के लिए, जैसा कि पूर्ववर्ती में दिखाया गया है

अनुभाग, सिनेमाघरों की संख्या जिनमें भारतीय फिल्में विदेशों में रिलीज होती हैं

रहने वाले (संभावित) उपभोक्ताओं की संख्या की तुलना में बहुत कम हैं

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विदेशों में और भारतीय फिल्म उद्योग में निर्मित फिल्मों की संख्या।

इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि भारतीय फिल्म उद्योग भी इसका उपयोग करने में विफल हो रहा है

सामग्री वितरित करने के लिए नई डिजिटल प्रौद्योगिकियों द्वारा प्रदान किए गए अवसर

विदेशों में अपने (संभावित) उपभोक्ताओं को सुरक्षित रूप से, जल्दी और सीधे। जब तक

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चूंकि उद्योग उन उपभोक्ताओं को वैध पहुंच प्रदान करने में विफल रहता है

विकल्प, किसी को और अधिक समुद्री लुटेरों से इस आकर्षक में प्रवेश करने की उम्मीद करनी चाहिए, फिर भी

उपेक्षित, बाजार।

III. ऑनलाइन पायरेसी के लिए स्थायी समाधान

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ऑनलाइन पायरेसी से होने वाले मौद्रिक नुकसान की पुष्टि करना कठिन है

विदेशों में भारतीय मीडिया सामग्री, क्योंकि उद्योग वर्तमान में इस बाजार की सेवा कर रहा है

केवल बहुत सीमित तरीके से। चूंकि शायद ही कोई बिक्री विस्थापन हो

हो रहा है, उद्योग के विचारों से सहमत होना कठिन है कि इंटरनेट

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पाइरेसी से भारतीय फिल्म उद्योग को काफी नुकसान हो रहा है। लेकिन केवल

क्योंकि भारत के भीतर इंटरनेट पायरेसी वर्तमान में इतनी बड़ी नहीं है, है ना?

अनिवार्य रूप से इसका मतलब यह है कि ऑनलाइन पायरेसी भारतीय फिल्म के लिए खतरा नहीं हो सकती है

उद्योग? अधिक किफायती और बेहतर ब्रॉडबैंड इंटरनेट कनेक्शन के साथ,

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64. आईडी।

65. इनमें से किसी एक में उपभोक्ता निवारण फोरम द्वारा ISP पर जुर्माना लगाना

नाजायज अवरोधन की घटनाएं इस मुद्दे की गंभीरता को दर्शाती हैं। विनय बी बनाम एयरटेल देखें

अधिकृत प्रतिनिधि, (2012) 226 सी.सी. 1, 9-10 (भारत), http://164.100.72.12 . पर उपलब्ध है

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/ncdrcrep/जजमेंट/18533120803153733968226-202.pdf। इस मामले में जिला

शिमोगा (कर्नाटक) में उपभोक्ता निवारण फोरम एयरटेल पर जुर्माना लगा रहा था

अंधाधुंध अवरोधन के खिलाफ भारत में सबसे प्रमुख इंटरनेट सेवा प्रदाता

मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा जारी जॉन डो के आदेश के नाम पर टोरेंट वेबसाइटें। पहचान।; देखो

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भी, अनुज श्रीवास, एयरटेल को ‘टोरेंट साइट’ ब्लॉक के लिए दंडित किया गया, वैधता पर सवाल उठाया गया, द हिंदू,

(7 अगस्त, 2012), http://www.thehindu.com/sci-tech/internet/article3738269.ece।

2013] भारतीय फिल्मों की ऑनलाइन पायरेसी 661

भारत के भीतर ऑनलाइन पायरेसी काफी हद तक बढ़ सकती है और अधिक लोग हो सकते हैं

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ऑनलाइन पायरेसी चैनलों पर माइग्रेट करें। अनुभवजन्य सर्वेक्षण से डेटा

उपयोग करने वालों के बीच पर्याप्त रूप से उच्च ऑनलाइन पायरेसी जोखिम के संबंध में

फिल्में देखने के लिए इंटरनेट भविष्य की इस चुनौती की ओर इशारा करता है। NS

पायरेटेड फिल्मों की स्ट्रीमिंग के संपर्क में आने वाले उत्तरदाताओं का प्रतिशत

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मूवी देखने के लिए इंटरनेट का उपयोग करने वाले उत्तरदाताओं में निम्न पाया गया

66.37% के रूप में उच्च और जोखिम वाले उत्तरदाताओं का प्रतिशत

डाउनलोडिंग 57.01%.66 जितनी अधिक है यह केवल इसलिए है क्योंकि

का प्रतिशत

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इंटरनेट पर फिल्में देखने वाले उत्तरदाताओं की संख्या बहुत कम है,

स्ट्रीम या डाउनलोड करने वाले उत्तरदाताओं का शुद्ध प्रतिशत

पायरेटेड फिल्में ऑनलाइन काफी कम पाई गई हैं।67 सस्ती और . के साथ

बेहतर इंटरनेट कनेक्शन, भारत में ऑनलाइन पायरेसी भी बढ़ सकती है

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काफी। यह उद्योग के दीर्घकालिक हित में होगा

ऑनलाइन पायरेसी की समस्या का समाधान करना और पायरेटेड उत्पादों की आपूर्ति को कम करना

इससे पहले कि अधिक उपभोक्ता ऑनलाइन पायरेटेड उत्पादों से परिचित हों।

इसके अलावा, उद्योग के लिए यह पहचानना भी महत्वपूर्ण है कि

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वैध उत्पाद पहुंच विकल्पों के साथ विदेशों में उपभोक्ताओं तक पहुंचना, वे

उनके राजस्व में काफी वृद्धि हो सकती है और इस तरह से भी बढ़ सकता है

फिल्मों की गुणवत्ता और विविधता में निवेश। सबसे महत्वपूर्ण उपाय

इस संबंध में लिया जाना प्रदान करने के लिए प्रतीक्षा अवधि कम कर रहा है

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विदेशों में उपभोक्ताओं के लिए फिल्मों की वैध पहुंच। सूचना प्रवाह के रूप में

नई फिल्म रिलीज पर पूर्व-डिजिटल युग में धीमी थी, फिल्म उद्योग

पहले विदेशों में उपभोक्ताओं से धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा करने की अपेक्षा की जा सकती थी

एक नई फिल्म देखने के लिए कई महीने। लेकिन सूचना क्रांति में

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आपस में जुड़ी दुनिया ने इसके बारे में सूचना अंतराल को काफी कम कर दिया है

नई मूवी। आज अधिकांश उपभोक्ता जल्द से जल्द मूवी देखना पसंद करेंगे

जैसा कि यह घरेलू रूप से जारी किया गया है। नई डिजिटल प्रौद्योगिकियां प्रदान करती हैं

उपभोक्ताओं तक फिल्मों के सुरक्षित और तेजी से प्रसारण की अपार संभावनाएं

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दुनिया भर में अलग-अलग मोड में। उदाहरण के लिए, की मदद से

डिजिटल ट्रांसमिशन प्रौद्योगिकियों, उद्योग द्वारा पेश किए गए अवसर

विदेशों में सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली फिल्मों की संख्या बढ़ा सकते हैं। इसी प्रकार, आई.पी

लोकेशन ट्रैकिंग टूल उद्योग को फिल्मों को ऑनलाइन रिलीज करने में सक्षम बनाते हैं,

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एक साथ उनकी घरेलू नाट्य विमोचन के साथ या तुरंत

बाद में, विशेष रूप से विदेशों में उपभोक्ताओं के लिए।68 ऐसे प्रयोग होंगे

भारत में छोटे क्षेत्रीय फिल्म उद्योगों की फिल्मों के लिए विशेष रूप से उपयोगी।

एक और समान रूप से महत्वपूर्ण उपाय जो किया जाना है वह है सहयोग

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उद्योग के भीतर किफायती, आसानी से खोजे जाने योग्य और सुलभ निर्माण के लिए

66. प्रश्नावली में किसकी पहचान करने के लिए एक स्क्रीनिंग प्रश्न शामिल किया गया था?

उत्तरदाता जो ऑनलाइन फिल्में देखते थे।

67. उदाहरण के लिए, उत्तरदाताओं में से जिन्होंने से संबंधित प्रश्न का उत्तर दिया है

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पायरेटेड फिल्मों की स्ट्रीमिंग, केवल 28.75% ऑनलाइन फिल्में देखते थे।

68. इस संबंध में अब तक के बहुत ही सीमित उदाहरणों में से एक का विमोचन था

बॉलीवुड फिल्म स्ट्राइकर विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के लिए एक ऑनलाइन मंच में। यह

अकेले स्ट्रीमिंग वेबसाइटों से $100,000 एकत्र करने का अनुमान है। केपीएमजी देखें, सुप्रा

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नोट 32, 56 पर।

662 मिशिगन स्टेट इंटरनेशनल लॉ रिव्यू [वॉल्यूम। 21:3

फिल्मों के डेटाबेस। इसके लिए फिल्म निर्माताओं के बीच सहयोग की आवश्यकता है

उनकी सामग्री के लाइसेंस के संबंध में। ऐसे डेटाबेस को न केवल

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विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्में हैं, लेकिन यहां से भी फिल्में हैं

अलग-अलग समय अवधि। यह आज पूरी तरह नदारद है। केवल वहाँ ही

भारतीय फिल्मों के लिए बहुत कम वैध स्ट्रीमिंग या डाउनलोडिंग वेबसाइटें

और उनमें से अधिकतर उचित अनुक्रमण की कमी के कारण भी खराब प्रदर्शन करते हैं, उच्च

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पहुंच की कीमतें, और फिल्मों की विविधता की कमी।

दूसरी ओर, किसी में अत्यधिक प्रशंसनीय दक्षता देखी जा सकती है

पायरेटेड मूवी प्लेटफॉर्म में सामग्री का आयोजन। वर्णानुक्रम / वर्षवार

विभिन्न क्षेत्रीय फिल्मों से फिल्मों के विशाल संग्रह की सूची बनाना

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भारत के भीतर उद्योग इस संबंध में एक अच्छा उदाहरण है। कई मामलों में

पुरानी एनालॉग फिल्मों को डिजिटल में बदलने के उनके प्रयास भी देखे जा सकते हैं

प्रारूप। इस संबंध में दो महत्वपूर्ण सबक हैं। सबसे पहले, निर्माता

भारत के भीतर विभिन्न क्षेत्रीय फिल्म उद्योगों से हाथ मिला सकते हैं और

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उपभोक्ताओं के लिए समान अनुभव प्रदान करने वाले नए डेटाबेस शुरू करें और

भारत के बाहर। दूसरा, वे उल्लंघनकर्ताओं के साथ बातचीत करने का भी प्रयास कर सकते हैं

राजस्व-साझाकरण व्यवसाय मॉडल बनाना और उल्लंघन करने वाले को परिवर्तित करना

प्लेटफॉर्म को वैध एक्सेस प्लेटफॉर्म के लिए। जबकि इस तरह के प्रयास होंगे

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सामान्य रूप से समाज के लिए कई सकारात्मक बाहरीताएं, जिनमें प्रावधान शामिल हैं

उल्लंघन करने वालों के लिए वैकल्पिक वैध आय, यह काफी बचत भी कर सकता है

निर्माताओं के लिए पैसा। इसमें शामिल लागतों से बचना शामिल है

फिल्मों को ऑनलाइन होस्ट करना और एनालॉग प्रिंट के पुन: रूपांतरण से बचना

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डिजिटल प्रारूप। दूसरे शब्दों में, की एकमात्र रणनीति अपनाने के बजाय

कानूनी या तकनीकी रूप से उल्लंघन करने वाले ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म को हटाना,

सहयोग की रणनीति अपनाकर उद्योग जगत को अधिक लाभ हो सकता है। कोई भी

दृष्टिकोण जो केवल पायरेटेड मीडिया प्लेटफॉर्म को नीचे ले जाने पर केंद्रित है,

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उपभोक्ताओं को वैकल्पिक वैध चैनल उपलब्ध कराए बिना ही होगा

शून्य को भरने के लिए नए उल्लंघनकारी प्लेटफार्मों के लिए सड़कें खोलना।

अंत में, भारतीय फिल्म उद्योग को भी अनुसरण करने की इच्छा दिखानी चाहिए

बदलती उपभोक्ता प्राथमिकताएं और उनके व्यवसाय मॉडल को अनुकूलित करने का प्रयास करें

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उन परिवर्तनों। वर्तमान में उद्योग केवल उपभोक्ताओं पर दबाव बना रहा है

के माध्यम से अपने पुराने व्यापार मॉडल का पालन करें

एच तकनीकी और कानूनी

संरक्षण के उपाय। उदाहरण के लिए, आज कई उपभोक्ता देखना चाहते हैं

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उनके पोर्टेबल डिजिटल उपकरणों की गोपनीयता और सुविधा में नई फिल्में

या घर। उन्हें अपने में फिल्मों तक पहुंचने का साधन प्रदान न करके

उपभोग के पसंदीदा रूप और उन्हें केवल फिल्में देखने के लिए मजबूर करके

सिनेमा और डीवीडी जैसे पारंपरिक चैनलों के माध्यम से, भारतीय फिल्म

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उद्योग व्यवसाय प्रथाओं में नवाचारों का विरोध करने की कोशिश कर रहा है। एक दिलचस्प

इस संबंध में ध्यान देने योग्य उदाहरण सिनेमा द्वारा दिखाया गया भारी प्रतिरोध है

सबसे प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता में से एक के प्रयास के खिलाफ मालिक/

निर्माता, कमल हसन, अपनी नवीनतम फिल्म “विश्वरूपम” को रिलीज़ करने के लिए

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डीटीएच प्लेटफॉर्म.69 सिनेमा मालिकों ने दी स्क्रीनिंग का बहिष्कार करने की धमकी

69. थिएटर मालिकों ने दी ‘विश्वरूपम’, डेक्कन हेराल्ड की स्क्रीनिंग के खिलाफ धमकी

(जनवरी 2, 2013), http://www.deccanherald.com/content/302552/theatre-owners-threaten-agains

2013] भारतीय फिल्मों की ऑनलाइन पायरेसी 663

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सिनेमाघरों में फिल्म और निर्माता को अंततः फिल्म की डायरेक्ट-टू-होम (डीटीएच) रिलीज को स्थगित करना पड़ा। 70 उन्होंने प्रतियोगिता से संपर्क किया है

सिनेमा मालिकों द्वारा की गई कार्रवाई के खिलाफ भारत आयोग।71 But

सबसे आश्चर्यजनक हिस्सा अन्य उत्पादकों से खुले समर्थन की कमी थी

इस निर्माता द्वारा किए गए उपन्यास प्रयास के लिए उद्योग के भीतर

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बदलती उपभोक्ता प्राथमिकताओं को देखते हुए नए माध्यमों का प्रयोग करें। अगर

उद्योग खपत पैटर्न बदलने के व्यापक मुद्दे को देखने में विफल रहता है, यह

नाटकीय राजस्व से परे अपने राजस्व को बढ़ाने में सक्षम नहीं हो सकता है। NS

समय की आवश्यकता नवीन व्यावसायिक प्रथाओं की है जो बदलते हुए को पूरा कर सकती हैं

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उपभोक्ता अपेक्षाएं।

निष्कर्ष

भारतीय फिल्म उद्योग ने हमेशा इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है

भारत में कॉपीराइट कानून के विकास को प्रभावित करना। नया डीआरएम

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भारतीय कॉपीराइट कानून के प्रावधान इस संबंध में अपवाद नहीं हैं।

फिल्म और मीडिया उद्योग द्वारा प्रायोजित अध्ययनों के प्रभाव में,

भारतीय संसद ने माना है कि ऑनलाइन पायरेसी का कारण बन रहा है

भारतीय कॉपीराइट धारकों को काफी नुकसान हुआ है और उन्होंने विचार किया है

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डीआरएम समस्या के पर्याप्त समाधान के रूप में प्रावधान करता है। द इंडियन

न्यायपालिका ने भी अनजाने में कई जारी कर इस मत का समर्थन किया है

मोटे तौर पर शब्दों के आदेश जो वैध उपयोगों और उपयोगकर्ताओं को प्रभावित कर सकते हैं

भारत में इंटरनेट। जैसा कि इस अध्ययन द्वारा अनुभवजन्य डेटा के माध्यम से दिखाया गया है, इंटरनेट

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हो सकता है कि वर्तमान में भारत के भीतर पायरेसी पर्याप्त स्तर पर न हो। प्राथमिक

उन पायरेटेड उत्पादों के उपभोक्ता (संभावित) उपभोक्ता हो सकते हैं

विदेश में, जो देखने के लिए वैध चैनलों तक पहुंच से वंचित हैं

भारतीय फिल्में। उद्योग के लिए अभिनव व्यवसाय विकसित करने का यह उच्च समय है

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केवल उन पर निर्भर होने के बजाय, उन संभावित उपभोक्ताओं तक पहुंचने के लिए अभ्यास

तकनीकी और कानूनी उपायों के माध्यम से उन उपभोक्ताओं के खिलाफ खतरा।

यदि उद्योग अपने पुराने व्यवसाय मॉडल को जारी रखने का प्रयास करता है

कानूनी और तकनीकी सुरक्षा उपायों के माध्यम से यह केवल विचलित हो सकता है

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उनके (संभावित) उपभोक्ताओं को डिजिटल में मनोरंजन के अन्य तरीकों के लिए

दुनिया।

टी-स्क्रीनिंग.एचटीएमएल।

70. 2 फरवरी को विश्वरूपम का डीटीएच रिलीज, टाइम्स ऑफ इंडिया, (15 जनवरी, 2013),

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http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2013-01-15/news-interviews/36352393_1_dth-rel

आसान-डीटीएच-प्लेटफॉर्म-डीटीएच-कंपनियां।

71. कमल ने प्रतिस्पर्धा आयोग, हिंदू, (13 जनवरी, 2013), http://www . का रुख किया

.thehindu.com/arts/cinema/kamal-moves-competition-commission/article4302568.ece।

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प्रकाशन आँकड़े देखें

इसलिए जितनी भी कोशिश कर लें legal team ये site वाले किसी न किसी तरीके से उठ खड़े जरुर होते हैं. इसमें कोई इनकी site से movies download होने को रोक नहीं सकता है.

Conclusion:

हमने अपने इस पोस्ट के माध्यम से पहले ही बता चूके हैं। Movierulz.Com एक Pirated Website वेबसाइट है। जो कि भारत में Illegal मानी जाती है, Indian Law इस वेबसाइट को अवैध घोषित कर चुका है। इस वेबसाइट का उपयोग करने पर आपको दंड के साथ साथ जुर्माना भी लगाया जाता है। इसलिए हमारी आपको यही सलाह रहेंगी आपको मूवीज़ देखने और Download करने के लिए किसी कानूनी वेबसाइट का इस्तेमाल करें। जो आपके भविष्य के लिए पूर्ण रूप से सुरक्षित होंगे।

Piracy ग़ैरकानूनी है, hi.backdroid.com Pirated Movies की Websites के उपयोग का समर्थन नहीं करता। यह लेख मात्र आपको जागरूक करने और जानकारी देने के उद्देश्य से लिखा गया है। hi.backdroid.com का उद्देश्य इन Websites को Promote करना कतई नहीं है।

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